खिड़की वाली सीट
शीशे पर बारिश की बूंदें और बाहर भागता हुआ हाईवे। सफर का असली मज़ा यहीं है।
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शीशे पर बारिश की बूंदें और बाहर भागता हुआ हाईवे। सफर का असली मज़ा यहीं है।
कंडक्टर की आवाज़, हाथ में छोटी सी टिकट और सामने लंबा रास्ता।
आधी रात का ढाबा, गरम चाय और बस की अगली सीट से आती इंजन की आवाज़।
बाहर बारिश, अंदर पुराने गाने और शीशे के पीछे भागती हुई रोशनियाँ।
रात के 11:45 बजे बस चली और सुबह तक घर पहुँचने की उम्मीद साथ चलती रही।
रास्ता कितना भी लंबा हो, जब मंज़िल घर हो तो हर किलोमीटर अच्छा लगता है।